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तेरी दुनिया से होके मजबूर चला ...
Saturday, 4 March 2006
खुश रहे तू है जहाँ
ले जा दुआएं मेरी
।
तेरी राहों से जुदा
हो गई राहें मेरी
।
कुछ नहीं साथ मेरे
बस हैं खताएं मेरी ...
।
तेरी दुनिया से होके मजबूर चला
।
मैं
बहुत
दूर
बहुत दूर चला ...
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घिर के आयेंगी बहारें फ़िर से सावन की
.
तुमतो बाँहों में रहोगी अपने साजन की...
.
गले हम गम को लगायेंगे सनम...
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आज के बाद....